आज अहले सुबह से ही बाबा मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ जुटी है और यह भीड़ खास कर मिथिलांचल से बाबा के तिलकोत्सव में शामिल होने आये श्रधालुओं की जो प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के दिन बाबा का जलाभिषेक करने देवघर आते हैं…विशेष प्रकार के कांवर,वेश-भूषा और भाषा से अलग पहचान रखने वाले ये मिथिलावासी अपने को बाबा का संबंधी मानते हैं और इसी नाते आज के दिन बाबा के तिलकोत्सव में शामिल होने देवघर आते हैं…कई टोलियों में आये ये मिथिलावासी शहर के कई जगहों पर इकठ्ठा होते हैं।
यहां के तीर्थ-पुरोहित की मानें तो बसंत पंचमी के अवसर पर मिथिलांचल के लोगों द्वारा देवाधिदेव महादेव को तिलक चढ़ाने की अति प्राचीन परम्परा रही है जिसे आज तक ये मिथिलावासी निभाते आ रहे हैं
बसंत पंचमी के अवसर पर सुलतानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से एक विशेष तरह के काँवर में जल भर कर ये श्रद्धालू देवघर पहुंचते हैं और बाबा को हिमालय पुत्री माँ पार्वती के विवाह में शामिल होने का निमंत्रण दे कर वापस अपने घर लौटते हैं…आज ही से महाशिवरात्री महोत्सव की शुरुआत भी हो जाती है…



