संताल परगना के पहाड़ी इलाके से एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय जानकारी सामने आयी है। दुमका के युवा शोधकर्ता कुलेश भंडारी ने यहाँ फ्लाइंग फॉक्स (बड़े चमगादड़) की एक सक्रिय और बड़ी कॉलोनी का पहली बार दस्तावेज़ीकरण किया है। तस्वीरों में शाम के समय दर्जनों चमगादड़ एक साथ ऊँचे पेड़ों से उड़ान भरते दिखाई देते हैं, जिसे विशेषज्ञ भाषा में मास फ्लाई–आउट कहा जाता है।
दुमका–गोड्डा–पाकुड़ वाले संताल परगना क्षेत्र में अब तक फ्लाइंग फॉक्स की ऐसी किसी कॉलोनी का वैज्ञानिक रिकॉर्ड नहीं मिला था। यही वजह है कि इस दस्तावेज़ीकरण को स्थानीय जैव–विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुलेश भंडारी ने बताया,
“इतने बड़े समूह को एक साथ उड़ते देखना इस इलाके के लिए असामान्य है। यह हमारे पहाड़ी जंगलों के अब भी स्वस्थ और जीवंत होने का संकेत देता है।”
फ्लाइंग फॉक्स भारत के सबसे बड़े चमगादड़ों में गिने जाते हैं और जंगलों में परागण व बीज फैलाव में अहम भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी और जनजातीय इलाकों में इनकी मौजूदगी जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जनन के लिए जरूरी होती है।
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह दस्तावेज़ीकरण आगे चलकर संरक्षण अध्ययन (conservation study) और शोध–पत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
कुलेश का यह कार्य अमेरिका स्थित The Pollination Project के सहयोग से चल रहे उनके पर्यावरणीय परियोजनाओं का हिस्सा भी है।
स्थानीय लोग भी बताने लगे हैं कि इस क्षेत्र में चमगादड़ दिखाई तो देते थे, लेकिन इतनी बड़ी और सक्रिय कॉलोनी का पता पहली बार चला है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के प्रमाण संताल परगना के जंगलों के महत्व को समझने में मदद करेंगे।



