देवघर जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति (CWC) के प्रयास से 14 साल से परिवार से बिछड़ी वृंदा कुमारी का सफल पुनर्मिलन उसके परिजनों से कराया गया। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया के दिशा-निर्देश में किए गए प्रयासों के बाद 30 वर्ष की वृंदा को उसके गृह जिले गढ़वा के रमना प्रखंड स्थित चटनियां गांव में परिवार से मिलाया गया।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2011 में करीब 15 वर्ष की उम्र में मानसिक अस्वस्थता के कारण वृंदा भटकते हुए हावड़ा पहुंच गई थी। ठीक से बोल नहीं पाने के कारण हावड़ा सीडब्ल्यूसी ने उसे एक वर्ष तक संरक्षण में रखा। वर्ष 2012 में उसे देवघर बालिका गृह भेजा गया। यहां उसकी नियमित देखभाल और काउंसिलिंग के साथ रांची स्थित रिनपास में इलाज कराया गया। धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ और उसे अपने परिवार के नाम याद आने लगे।
इसके बाद उपायुक्त के निर्देश पर देवघर सीडब्ल्यूसी ने गढ़वा के रमना थाना प्रभारी और स्थानीय मुखिया से संपर्क कर परिवार की तलाश शुरू की। जांच के बाद परिजनों का पता चला, जिन्होंने वर्षों पहले वृंदा के वापस नहीं लौटने पर उसके जीवित होने की उम्मीद छोड़ दी थी। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 25 सितंबर को रमना थाना परिसर में वृंदा को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। लंबे इंतजार के बाद बेटी को सुरक्षित पाकर परिवार भावुक हो उठा।
