गोड्डा: नगर विकास के नाम पर लाखों रुपये फूंके गए, लेकिन नतीजा आज सबके सामने है। शहर के सबसे व्यस्त इलाके कारगिल चौक स्थित सरकारी दुकान की छत पर लगाया गया LED Display Board अब शोभा नहीं, बल्कि शर्म का कारण बन चुका है। जिस बोर्ड से नगर परिषद को नियमित आमदनी होनी थी, वह महीनों से बंद पड़ा जंग खाता ढांचा बन गया है।
प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे—शहर की सूचनाएं, सरकारी योजनाओं का प्रचार और व्यावसायिक विज्ञापनों से नगर परिषद की आय बढ़ाने का सपना दिखाया गया। लेकिन देखरेख शून्य, जवाबदेही गायब और अफसरशाही की लापरवाही ने इस योजना को शुरू होने से पहले ही कब्र में पहुंचा दिया।
स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी है। लोगों का सीधा सवाल है—
“जब बोर्ड चलाना ही नहीं था, तो लाखों रुपये खर्च क्यों किए गए?
क्या यह पैसा जनता का नहीं था?”
सबसे गंभीर सवाल अब भी अनुत्तरित हैं—
इस LED बोर्ड पर अब तक कितनी आमदनी हुई, इसका हिसाब कहां है?
खराब होने के बाद मरम्मत के लिए किस विभाग ने क्या कदम उठाया?
या फिर यह पूरी योजना सिर्फ कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गई?
कारगिल चौक जैसी वीआईपी लोकेशन पर लगा यह LED बोर्ड आज विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता, लूट और नाकामी का पोस्टर बन चुका है।
अब सवाल यह नहीं कि बोर्ड कब चलेगा—
सवाल यह है कि इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई कब होगी?
या फिर गोड्डा की जनता को ऐसे ही हर बार “सफेद हाथी” थमाते रहेंगे?
