14 एमओयू के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेश किया विकास का नया विजन……..
रांची। झारखंड को केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान से आगे बढ़ाकर ज्ञान, शोध और तकनीकी नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार का संकल्प झारखंड को ‘माइंस’ से ‘माइंड्स’ की ओर ले जाना है। उन्होंने कहा कि राज्य में अब केवल नीतियां नहीं, बल्कि विकास की नई संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान झारखंड सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिंदल ग्रुप, वरुण बेवरेजेस, टाटा समूह, गूगल, ईज माय ट्रिप, जनरल स्टील, पावर न्यूक्लियर सहित विभिन्न औद्योगिक एवं वैश्विक संस्थाओं के साथ कुल 14 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। साथ ही कई विभागों की ड्राफ्ट नीतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये एमओयू केवल कागजी समझौते नहीं, बल्कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की उपलब्धियां हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और राज्य के विकास के लिए दीर्घकालिक साझेदारी पर विशेष ध्यान दिया जाए।
हेमंत सोरेन ने आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने जियाडा (JIADA) के तहत आदिवासी समूहों को दी जा रही 25 प्रतिशत रियायत की समीक्षा कर इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि अतीत में संवाद की कमी के कारण झारखंड की वास्तविक क्षमताएं दुनिया के सामने नहीं आ सकीं। उन्होंने कहा कि सरकार अब निवेशकों, उद्योग जगत और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखेगी, ताकि राज्य को रिसर्च, इनोवेशन और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाया जा सके। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए झारखंड के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।
